आवार मोरे पागल करे दिवे के
Abar more pagol kore
प्रेम और प्रकृति
आवार मोरे पागल करे दिवे के।
हृदय़
येन पाषाण-हेन
विराग-भरा विवेके॥
आवार
प्राणे नूतन टाने प्रेमेर नदी
पाषाण
हते उछल स्रोते वहाय़ यदि –
आवार
दुटि नय़ने लुटि हृदय़
ह’रे निवे के!
आवार
मोरे पागल करे दिवे के॥
आवार कवे धरणी हवे तरुणा।
काहार
प्रेमे आसिवे नेमे स्वरग
हते करुणा।
निशीथनभे शुनिव कवे गभीर गान,
ये दिके
चाव देखिते पाव नवीन प्राण,
नूतन
प्रीति आनिवे निति कुमारी
उषा अरुणा।
आवार
कवे धरणी हवे तरुणा।
दिवे से खुलि ए घोर धूलि- आवरण।
ताहार
हाते आँखिर पाते
जगत-जागा जागरण।
से
हासिखानि आनिवे टानि सवार हासि।
गड़िवे
गेह, जागावे स्नेह– जीवनराशि।
प्रकृतिवधू चाहिवे मधु, परिवे
नव आभरण–
से दिवे
खुलि ए घोर धूलि- आवरण।
हृदय़े एसे मधुर हेसे प्राणेर
गान गाहिय़ा
पागल
करे दिवे से मोरे चाहिय़ा।
आपना
थाकि भासिवे आँखि आकुल नीरे,
झरना सम जगत मम झरिवे शिरे–
ताहार
वाणी दिवे गो आनि सकल
वाणी वाहिय़ा।
पागल
करे दिवे से मोरे चाहिय़ा॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Aabar more paagol kore dibe ke. Hriday jeno paashan-heno birag-bhora bibeke. Aabar praane nutan taane premer nodi Paashan hote uchhal srote bahaay jodi - Aabar duti nayone luti hriday hare nibe ke. Aabar more paagol kore dibe ke. Aabar kobe dharoni habe toruna. Kaahar preme aasibe neme swarogo hote koruna. Nishithonabhe shunibo kabe gobhiro gaan, Je dike chaabo dekhite paabo nobino praan, Nutan preeti aanibe niti kumari usha oruna. Aabar kabe dharanee hobe toruna. Dibe se khuli e ghor dhuli - aaboran. Taahar haate aankhir paate jagat-jaaga jaagoran. Se haasikhaani aanibe taani sabar haasi. Goribe geho, jaagabe sneho - jeebanoraashi. Prokritibodhu chaahibe modhu, poribe nabo aabhoran - Se dibe khuli e ghor dhuli - aaboran. Hridaye ese modhur hese praaner gaan gaahiya Paagol kore dibe se more chaahiya Aapona thaaki bhaasibe aankhi aakul neere, Jharna-samo jagot-mamo jhoribe shire - Taahar baani dibe go aani sakol baani baahiya. Paagol kore dibe se more chaahiya.
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यूट्यूब पर
- पर्याय
- प्रेम और प्रकृति · 49(প্রেম ও প্রকৃতি)
- राग
- किर्तन(কীর্তন)
- ताल
- झम्पक(ঝম্পক)
- घराना
- शास्त्रीय और क्षेत्रीय रूप(শাস্ত্রীয় ও আঞ্চলিক রূপ)
- संकलन
- मनसी, कविता - 'शुन्य हृदयेर आकाङ्क्षा' (पौष, १२९७)(মানসী, কবিতা - 'শূন্য হৃদয়ের আকাঙ্ক্ষা' (পৌষ, ১২৯৭))
- स्थान
- ४९, पार्क स्ट्रीट, कलकत्ता(৪৯ পার্ক স্ট্রিট, কলকাতা)
- स्वरबितान खण्ड
- स्वरबितन ३३ (कब्यगीति)(স্বরবিতান ৩৩ (কাব্যগীতি))
- स्वरलिपि
- दिनेंद्रनाथ ठाकुर
दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 29 June 1887(১৫ আষাঢ় ১২৯৪)
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