আজ বুকের বসন ছিঁডে ফেলে দাঁডিযেছে এই প্রভাতখানি
Aj buker basan chhire
Prem O Prakriti
आज वुकेर वसन छिँडे फेले दाँडियेछे एइ प्रभातखानि । आकाशेते सोनार आलोय छडिये गेल ताहार वाणी । ओरे मन, खुले दे मन, या आछे तोर खुले दे— अन्तरे या डुवे आछे आलोक-पाने तुले दे । आनन्दे सव वाधा टुटे सवार साथे ओठ् रे फुटे— चोखेर 'परे आलस-भरे राखिस ने आर आँचल टानि ॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Aaj buker bason chhnire phele dnaariyechhe ei probhatkhani. Aakashete sonar aaloy chhoriye gelo taahar baani. Ore mon, khule de mon, jaa aachhe tor khule de - Antare jaa dube aachhe aalok-paane tule de. Aanonde sab baadha tute sabar saathe otth re phute - Chokher pare aalas-bhore raakhis ne aar aanchal taani.
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यूट्यूब पर
- पर्याय
- Prem O Prakriti · 62(প্রেম ও প্রকৃতি)
- राग
- Bhairavi(ভৈরবী)
- ताल
- Teyora(তেওরা)
- घराना
- Hindustani
- संकलन
- Kheya
- स्थान
- Shilaidaha, Padma
- स्वरबितान खण्ड
- 50 (Shephali)
- स्वरलिपि
- Dinendranath Tagore / Kangalicharan Sen
- रचनाकाल
- 7 February 1906(২৫ মাঘ ১৩১২)
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