आज वुकेर वसन छिँडे फेले दाँडियेछे एइ प्रभातखानि
Aj buker basan chhire
प्रेम और प्रकृति
आज वुकेर वसन छिँडे फेले दाँडियेछे एइ प्रभातखानि । आकाशेते सोनार आलोय छडिये गेल ताहार वाणी । ओरे मन, खुले दे मन, या आछे तोर खुले दे— अन्तरे या डुवे आछे आलोक-पाने तुले दे । आनन्दे सव वाधा टुटे सवार साथे ओठ् रे फुटे— चोखेर 'परे आलस-भरे राखिस ने आर आँचल टानि ॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Aaj buker bason chhnire phele dnaariyechhe ei probhatkhani. Aakashete sonar aaloy chhoriye gelo taahar baani. Ore mon, khule de mon, jaa aachhe tor khule de - Antare jaa dube aachhe aalok-paane tule de. Aanonde sab baadha tute sabar saathe otth re phute - Chokher pare aalas-bhore raakhis ne aar aanchal taani.
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- प्रेम और प्रकृति · 62(প্রেম ও প্রকৃতি)
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- दिनेंद्रनाथ ठाकुर
दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain / कांगालिचरण सेन - रचनाकाल
- 7 February 1906(২৫ মাঘ ১৩১২)
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