आज श्रावणेर आमन्त्रणे
Aj shraboner amontrane
प्रकृति
आज श्रावणेर आमन्त्रणे दुय़ार काँपे क्षणे क्षणे, घरेर वाँधन याय़ वुझि आज टुटे॥ धरित्री तार अङ्गनेते नाचेर ताले ओठेन मेते, चञ्चल ताँर अञ्चल याय़ लुटे॥ प्रथम युगेर वचन शुनि मने नवश्यामल प्राणेर निकेतने। पुव-हाओय़ा धाय़ आकाशतले, तार साथे मोर भावना चले कालहारा कोन् कालेर पाने छुटे॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Aaj shraaboner aamontrone Duwar knaape khane khane, Gharer bnaadhon jaay bujhi aaj tute. Dhoritri taar aangonete naacher tale otthen mete, Chanchalo taar aanchalo jaay lute. Prothom juger bachon shuni mone Naboshyamol praaner niketane. Pub haawa dhaay aakashtale, taar saathe mor bhaabna chale Kaalhaara kon kaaler paane chhute.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- July 1929(শ্রাবণ ১৩৩৬)
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