आज तालेर वनेर करतालि
Aj taler boner karotali
प्रकृति
आज तालेर वनेर करतालि किसेर ताले
पूर्णिमाचाँद माठेर पारे ओठार काले॥
ना-देखा कोन् वीणा वाजे
आकाश-माझे,
ना-शोना कोन् राग रागिणी
शून्ये ढाले॥
ओर खुशिर साथे कोन् खुशिर आज मेलामेशा,
कोन् विश्वमातन गानेर नेशाय़ लागल नेशा।
ताराय़ काँपे रिनिझिनि ये
किङ्किणी
तारि काँपन लागल कि ओर मुग्ध
भाले॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Aaj taaler boner karotali kiser taale Purnimachnaad maatther pare otthar kaale. Na-dhekha kon bina baaje aakash maajhe, Na sona kon raag raagini shunye dhaale. Or khushir saathe kon khushir aaj melamesha, Kon bishwomaaton gaaner neshay laaglo nesha. Taaray knaape rinijhini je kinkini Taari knaapan laaglo ki or mugdho bhaale.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1922(১৩২৯)
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