আজি বসন্ত জাগ্রত দ্বারে
Aji basanta jagrata
Prakriti
आजि वसन्त जाग्रत द्वारे। तव अवगुण्ठित कुण्ठित जीवने कोरो ना विड़म्वित तारे॥ आजि खुलिय़ो हृदय़दल खुलिय़ो, आजि भुलिय़ो आपन पर भुलिय़ो, एइ सङ्गीतमुखरित गगने तव गन्ध तरङ्गिय़ा तुलिय़ो। एइ वाहिर-भुवने दिशा हाराय़े दिय़ो छड़ाय़े माधुरी भारे भारे॥ एकि निविड़ वेदना वनमाझे आजि पल्लवे पल्लवे वाजे– दूरे गगने काहार पथ चाहिय़ा आजि व्याकुल वसुन्धरा साजे। मोर पराने दखिनवाय़ु लागिछे, कारे द्वारे द्वारे कर हानि मागिछे– एइ सौरभविह्वल रजनी कार चरणे धरणीतले जागिछे। ओहे सुन्दर, वल्लभ, कान्त, तव गम्भीर आहवान कारे॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Aaji basonto jaagroto dwaare. Tabo aboguntthito kuntthito jibone Koro na birombito taare. Aaji khuliyo hridayodol khuliyo, Aaji bhuliyo aapon-por bhuliyo, Ei songeetomukhorito gagone Tabo gandho tarongiya tuliyo. Ei baahir bhubone disha haaraye Diyo chhoraye maadhuri bhaare bhaare. Eki nibiro bedona bonomaajhe Aaji pallobe pallobe baaje - Dure gagone kaahar patho chaahiya Aaji byakulo bosundhora saaje. Mor porane dokhinobaayu laaghichhe, Kaare dwaare dwaare karo haani maagichhe - Ei sourobhobihwalo rajoni Kaar charone dharonitole jaagichhe. Ohey sundoro, ballabho , kaanto, Tabo gombhiro aahwan kaare.
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यूट्यूब पर
- पर्याय
- Prakriti · 190(প্রকৃতি)
- उप-पर्याय
- Basanta
- राग
- Bahaar
- ताल
- Tritaal(ত্রিতাল)
- संकलन
- Geetanjali
- स्थान
- Bolpur
- स्वरबितान खण्ड
- 38
- स्वरलिपि
- Dinendranath Tagore / Bhimrao Shastri
- रचनाकाल
- 9 April 1910(২৬ চৈত্র ১৩১৬)
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