আজি গোধূলিলগনে এই বাদলগগনে
Aji godhuli lagone
Prem
५२ आजि गोधूलिलगने एइ वादलगगने तार चरणध्वनि आमि हृदय़े गणि– ‘से आसिवे’ आमार मन वले सारावेला, अकारण पुलके आँखि भासे जले॥ अधीर पवने तार उत्तरीय़ दूरेर परशन दिल कि ओ– रजनीगन्धार परिमले ‘से आसिवे’ आमार मन वले॥ उतला हय़ेछे मलतीर लता, फुरालो ना ताहार मनेर कथा। वने वने आजि एकि कानाकानि, किसेर वारता ओरा पेय़ेछे ना जानि, काँपन लागे दिगङ्गनार वुकेर आँचले– ‘से आसिवे’ आमार मन वले॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Aaji godhulilagone ei baadalogagone Taar charonodhwoni aami hridaye goni - 'Se aasibe' aamar mon bale saarabela, Akaarano pulake aankhi bhaase jale. Adhiro pabone taar uttoriyo durero paroshano dilo ki o Rajonigandhar porimale 'Se aasibe' aamar mon bale. Utala hoyechhe maalotiro lata, phuralo na taahar monero katha. Bone bone aaji eki kaanakaani, Kisero baarota ora peyechhe na jaani, Knaapono laage diganganar bukero aanchale - 'Se aasibe' aamar mon bale.
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- प्रकाशित
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- स्वरबितान खण्ड
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- स्वरलिपि
- Shailajaranjan Majumdar
- रचनाकाल
- 1937(১৩৪৪)
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