आजि मर्मरध्वनि केन जागिल रे
Aji marmardhwani keno
पूजा
३४१ आजि मर्मरध्वनि केन जागिल रे! मम पल्लवे पल्लवे हिल्लोले हिल्लोले थरथर कम्पन लागिल रे॥ कोन् भिखारि हाय़ रे एल आमारि ए अङ्गनद्वारे, वुझि सव मन धन मम मागिल रे॥ हृदय़ वुझि तारे जाने, कुसुम फोटाय़ तारि गाने। आजि मम अन्तरमाझे सेइ पथिकेरइ पदध्वनि वाजे, ताइ चकिते चकिते घुम भाङिल रे॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Aaji marmarodhwoni keno jaagilo re ! Mamo pallobe pallobe hillole hillole Tharotharo kampano laagilo re. Kon bhikhari haay re elo aamari e anganodwaare, Bujhi sab mon dhon mamo maagilo re. Hriday bujhi taare jaane, Kusumo photay taari gaane. Aaji mamo antaromaajhe sei pothikeri padodhwoni baaje, Taai chokite chokite ghum bhaangilo re.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1923(১৩৩০)
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