गीत / प्रेम और प्रकृति

आजि मोर द्वारे

Aji mor dware kahar

प्रेम और प्रकृति
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आजि    मोर द्वारे काहार मुख हेरेछि॥

जागि उठे प्राणे गान कत ये।

गाहिवारे सुर भुले गेछि रे॥

यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।

लिप्यंतरण

Aaji mor dwaare kaahar mukh herechhi.
Jaagi utthe praane gaan kato je.
Gaahibare sur bhule gechhi re.