आजि साँझेर यमुनाय़ गो
Aji sajher jomunay go
प्रेम
आजि साँझेर यमुनाय़ गो
तरुण चाँदेर किरणतरी कोथाय़ भेसे याय़ गो॥
तारि सुदूर
सारिगाने विदाय़स्मृति जागाय़ प्राणे
सेइ-ये दुटि उतल आँखि उछल करुणाय़ गो॥
आज मने मोर ये सुर
वाजे केउ ता शोने नाइ कि।
एकला प्राणेर कथा निय़े एकला ए दिन याय़ कि।
याय़ यावे, से फिरे
फिरे लुकिय़े तुले नेय़ नि कि रे
आमार परम वेदनखानि आपन वेदनाय़ गो॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Aaji snaajher jomunay go Torun chnaader kiranotori kothay bhese jaay go. Taari sudur saarigaane bidaysmriti jaagay praane Sei-je duti utalo aankhi uchhalo korunay go. Aaj mone mor je sur baaje keu ta shone naai ki. Ekla praaner katha niye ekla e din jaay ki. Jaay jaabe, se phire phire lukiye tule ney ni ki re Aamar paramo bedanokhaani aapono bedonay go.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1923(১৩৩০)
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