আজি উন্মাদ মধুনিশি ওগো
Aji unmad modhunishi
Natyageeti
आजि उन्माद मधुनिशि ओगो चैत्रिशीथशशी । तुमि ए विपुल धरणीर पाने की देखिछ एका वसि चैत्रिशीथशशी ॥ कत नदीतीरे कत मन्दिरे कत वातायनतले कत कानाकानि, मन-जानाजानि साधासाधि कत छले । शाखा-प्रशाखार द्वार-जानालाय आडाले आडाले पशि कत सुखदुख कत कौतुक देखितेछ एका वसि चैत्रिशीथशशी ॥ मोरे देखो चाहि— केह कोथा नाहि, शून्यभवनछादे नैश पवन काँदे । तोमारि मतन एकाकी आपनि चाहिया रयेछि वसि चैत्रिशीथशशी ॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Aaji unmad modhunishi ogo choitronishithoshoshi. Tumi e bipul dharonir paane ki dekhichho eka bosi Choitronishithoshoshi Kato noditire kato mondire kato baatayantale Kato kaanakaani, mon jaanajaani saadhasaadhi kato chhale. Shaakha-proshaakhar dwaar jaanalar aarale aarale poshi Kato sukhodukho kato koutuko dekhitechho eka bosi Choitronishithoshoshi. More dekho chaahi - keho kotha naahi, shunyobhabonochhaade Noisho pabon knaande. Tomari moton ekaaki aaponi chaahiya royechhi bosi Choitronishithoshoshi.
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- Natyageeti · 56(নাট্যগীতি)
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- 1897(১৩০৪)
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