आकुल केशे आसे
Akul keshe ase
प्रेम
आकुल केशे आसे, चाय़ म्लाननय़ने,
के गो चिरविरहिणी–
निशिभोरे आँखि जड़ित घुमघोरे,
विजन भवने कुसुमसुरभि मृदु पवने,
सुखशय़ने, मम प्रभातस्वपने
शिहरि
चमकि जागि तारि लागि।
चकिते मिलाय़ छाय़ाप्राय़, शुधु रेखे याय़
व्याकुल वासना कुसुमकानने॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Aakul keshe aase, chaay mlaanonayone, Ke go chiro birohini - Nishibhore aankhi jorito ghumoghore, Bijano bhabone kusumo surobhi mridu pabone, Sukhoshayone, mamo probhatoswapone. Shihori chamoki jaagi taar laagi. Chokite milay chaayapraay, shudhu rekhe jaay Byakulo baasona kusumokaanone.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1895(১৩০২)
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