आलो ये आज गान करे मोर प्राणे गो
Alo je aj gan kore
पूजा
५१८
आलो ये आज गान करे मोर प्राणे गो।
के एल मोर अङ्गने के जाने गो॥
हृदय़ आमार
उदास करे केड़े निल आकाश मोरे,
वातास आमाय़ आनन्दवाण हाने गो॥
दिगन्तेर ओइ नील नय़नेर छाय़ाते
कुसुम येन विकाशे मोर काय़ाते।
मोर हृदय़ेर
सुगन्ध ये वाहिर हल काहार खोँजे,
सकल जीवन चाहे काहार पाने गो॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Aalo je aaj gaan kare mor praane go Ke elo mor angone ke jaane go. Hriday aamar udaas kare kere nilo aakash more, Baatas aamay aanondobaan haane go. Diganter oi nil nayoner chhaayate Kusum jeno bikashe mor kaayate. Mor hridayer sugandho je baahir holo kaahar khnoje, Sakol jiban chaahe kaahar paane go.
मेरा नोट
निजी नोट आपकी योजना में शामिल नहीं हैं।सदस्य बनें →
इसके लिए उच्च योजना चाहिए — अधिक मासिक प्ले और एक्सपोर्ट, गाने की स्वरलिपि तथा स्केल, वाद्ययंत्र, ताल और लय नियंत्रण के लिए अपग्रेड करें। सभी प्लान देखें → Patreon से साइन इन करें
यूट्यूब पर
- पर्याय
- पूजा · 518(পূজা)
- उप-पर्याय
- सुन्दर(সুন্দর)
- राग
- भैरव(ভৈরব)
- ताल
- कहर्व(কাহারবা)
- संकलन
- गीतालि(গীতালি)
- स्थान
- शांतिनिकेतन(শান্তিনিকেতন)
- स्वरबितान खण्ड
- स्वरबीतन ४४(স্বরবিতান ৪৪)
- स्वरलिपि
- सुधीर चंद्र करसुधीर चंद्र कर1906–1977Rabindranath's personal scribe in his last years: when illness kept the poet from writing, he dictated and Sudhirchandra set it down.
- रचनाकाल
- 30 September 1914(১৪ আশ্বিন ১৩২১)
AI अनुवाद
अभी कोई अनुवाद नहीं — नीचे कोई भाषा चुनकर AI से अनुवाद बनाएँ।
भाषाएँ
प्रीमियम भाषाएँ
AI-निर्मित
अनुवाद बन रहा है…
इस समय अनुवाद नहीं बनाया जा सका। फिर से प्रयास करें।