आमार मन चेये रय मने मने हेरे माधुरी
Amar mon cheye roy
प्रेम
आमार मन चेये रय मने मने हेरे माधुरी । नयन आमार काङाल हये मरे ना घुरि ॥ चेये चेये वुकेर माझे गुञ्जरिल एकतारा ये— मनोरथेर पथे पथे वाजल वाँशुरि । रूपेर कोले ओइ-ये दोले अरूप माधुरी ॥ कुलहारा कोन् रसेर सरोवरे मूलहारा फुल भासे जलेर 'परे । हातेर धरा धरते गेले ढेउ दिये ताय दिइ ये ठेले— आपन-मने स्थिर हये रइ, करि ने चुरि । धरा देओयार धन से तो नय, अरूप माधुरी ॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Aamar mon cheye roy mone mone here maadhuri. Nayon aamar kaangal hoye more naa ghuri. Cheye cheye buker maajhe gunjorilo ektara je - Monorather pathe pathe baajlo bnaashuri. Ruper kole oi je dole arup maadhuri. Kulhara kon raser sarobare mulhara phul bhaase jaler pore. Haater dhara dhorte gele dheu diye taay diyi je tthele - Aapon mone sthir hoye roi, kori ne churi. Dhara dewar dhon se to noy, arup maadhuri.
मेरा नोट
निजी नोट आपकी योजना में शामिल नहीं हैं।सदस्य बनें →
इंटरैक्टिव स्वरलिपि जल्द ही आ रही है।
यूट्यूब पर
- पर्याय
- प्रेम · 319(প্রেম)
- उप-पर्याय
- प्रेम्-बोइचित्र(প্রেম্-বোইচিত্র)
- राग
- आसावरी-भैरवी(আশাবরী-ভৈরবী)
- ताल
- तेयोर(তেওরা)
- घराना
- हिन्दुस्तानी(হিন্দুস্তানি)
- प्रकाशित
- शन्तिनिकेतन पत्रिक(শান্তিনিকেতন পত্রিকা)
- स्वरबितान खण्ड
- स्वरबीतन ३०(স্বরবিতান ৩০)
- स्वरलिपि
- दिनेंद्रनाथ ठाकुर
दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1924(১৩৩১)
AI अनुवाद
अभी कोई अनुवाद नहीं — नीचे कोई भाषा चुनकर AI से अनुवाद बनाएँ।
भाषाएँ
प्रीमियम भाषाएँ
AI-निर्मित
अनुवाद बन रहा है…
इस समय अनुवाद नहीं बनाया जा सका। फिर से प्रयास करें।