आमार प्राणे गभीर गोपन
Amar prane gobhir gopan
पूजा
३४० आमार प्राणे गभीर गोपन महा-आपन से कि, अन्धकारे हठाৎ तारे देखि॥ यवे दुर्दम झड़े आगल खुले पड़े, कार से नय़न-’परे नय़न याय़ गो ठेकि॥ यखन आसे परम लगन तखन गगन-माझे ताहार भेरी वाजे। विद्युत-उद्भासे वेदनारइ दूत आसे, आमन्त्रणेर वाणी याय़ हृदय़े लेखि॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Aamaro praane gobhiro gopano maha aapano se ki, Andhokare hatthat taare dekhi. Jabe durdamo jhare aagal khule pare, Kaar se nayono pare nayono jaay go ttheki. Jakhon aase paromo lagono takhon gagon-maajhe Taahar bheri baaje. Bidyuto udbhaase bedonari dut aase, Aamontraner baani jaay hridaye lekhi.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1926(১৩৩৩)
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