आँधार कुँडिर वाँधन टुटे चाँदेर फुल उठेछे फुटे
Adhar kurir badhon
प्रकृति
आँधार कुँडिर वाँधन टुटे चाँदेर फुल उठेछे फुटे ॥ तार गन्ध कोथाय, गन्ध कोथाय रे । गन्ध आमार गभीर व्यथाय हृदय-माझे लुटे ॥ ओ कखन यावे सरे, आकाश हते पडवे झरे । ओरे राखव कोथाय, राखव कोथाय रे । राखव ओरे आमार व्यथाय गानेर पत्रपुटे ॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Aandhar kurir bnaadhon tute chnaader phul uttheche phute. Taar gandho kothay, gandho kothay re. Gandho aamar gobhir byathay hriday-maajhe lute. O kakhon jaabe sore, aakash hote porbe jhore. Ore raakhbo kothay, raakhbo kothay re. Raakhbo ore aamar byathay gaaner patropute.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1922(১৩২৯)
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