আঁধার কুঁডির বাঁধন টুটে চাঁদের ফুল উঠেছে ফুটে
Adhar kurir badhon
Prakriti
आँधार कुँडिर वाँधन टुटे चाँदेर फुल उठेछे फुटे ॥ तार गन्ध कोथाय, गन्ध कोथाय रे । गन्ध आमार गभीर व्यथाय हृदय-माझे लुटे ॥ ओ कखन यावे सरे, आकाश हते पडवे झरे । ओरे राखव कोथाय, राखव कोथाय रे । राखव ओरे आमार व्यथाय गानेर पत्रपुटे ॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Aandhar kurir bnaadhon tute chnaader phul uttheche phute. Taar gandho kothay, gandho kothay re. Gandho aamar gobhir byathay hriday-maajhe lute. O kakhon jaabe sore, aakash hote porbe jhore. Ore raakhbo kothay, raakhbo kothay re. Raakhbo ore aamar byathay gaaner patropute.
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- पर्याय
- Prakriti · 5(প্রকৃতি)
- उप-पर्याय
- sadharan
- राग
- Khambaj(খাম্বাজ)
- ताल
- Kaharwa(কাহারবা)
- घराना
- Hindustani
- ऋतु
- Sadharan(সাধারণ)
- स्वरबितान खण्ड
- 14 (Nabagitika 1)
- स्वरलिपि
- Dinendranath Tagore
- रचनाकाल
- 1922(১৩২৯)
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