गीत / प्रकृति

आज प्रथम फुलेर पाव प्रसाद (प्रथम फुलेर पाव प्रसाद)

aja prathama phulera pava prasada prathama phulera pava prasada

प्रकृति
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आज   प्रथम फुलेर पाव प्रसादखानि,
ताइ   भोरे उठेछि।

आज   शुनते पाव प्रथम आलोर वाणी,
ताइ   वाइरे छुटेछि॥

   एइ   हल मोदेर
पाओय़ा,   ताइ   धरेछि गान-गाओय़ा,

   आज   लुटिय़े
हिरण-किरण-पद्मदले   सोनार   रेणु
लुटेछि॥

आज पारुलदिदिर वने   मोरा   चलव
निमन्त्रणे,

   चाँपा-भाय़ेर शाखा-छाय़ेर
तले    मोरा
सवाइ जुटेछि।

   आज   मनेर मध्ये
छेय़े   सुनील   आकाश ओठे गेय़े,

   आज   सकालवेलाय़ छेलेखेलार
छले   सकल   शिकल टुटेछि॥

यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।