गीत / विचित्र

आमरा लक्ष्मीछाड़ार दल

amara lakshmichadara dala

विचित्र
साझा कीजिए
आमरा
लक्ष्मीछाड़ार
दल
भवेर      पद्मपत्रे जल

सदा  करछि टलोमल।

      मोदेर
आसा-याओय़ा शून्य हाओय़ा, नाइको फलाफल॥

नाहि जानि करण-कारण,   नाहि जानि धरण-धारण,

नाहि मानि शासन-वारण गो–

      आमरा  आपन
रोखे मनेर झोँके छिँड़ेछि शिकल॥

लक्ष्मी, तोमार वाहनगुलि  धने पुत्रे उठुन फुलि,

लुठुन तोमार चरणधूलि गो–

आमरा  स्कन्धे लय़े काँथा झुलि फिरव धरातल।

  तोमार  वन्दरेते वाँधा घाटे  वोझाइ-करा
सोनार पाटे

अनेक रत्न अनेक हाटे गो–

      आमरा
नोङर-छेँड़ा भाङा तरी भेसेछि केवल॥

  आमरा एवार खुँजे देखि  अकूलेते कूल मेले कि,

द्वीप आछे कि भवसागरे।

यदि  सुख ना जोटे देखव डुवे कोथाय़ रसातल।

आमरा जुटे सारा वेला    करव हतभागार मेला,

गाव गान  खेलव खेला गो–

कन्ठे यदि गान ना आसे करव कोलाहल॥

यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।