गीत / प्रकृति

आमार मल्लिकावने (यखन मल्लिकावने प्रथम धरेछे)

amara mallikavane yakhana mallikavane prathama dhareche

प्रकृति
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यखन
मल्लिकावने प्रथम धरेछे कलि

   तोमार लागिय़ा तखनि, वन्धु, वेँधेछिनु अञ्जलि॥

तखनो कुहेलिजाले,

सखा,     तरुणी ऊषार भाले

   शिशिरे शिशिरे अरुणमालिका उठितेछे छलोछलि॥

   एखनो वनेर गान
वन्धु,   हय़ नि तो अवसान–

तवु   एखनि यावे कि चलि।

      ओ
मोर   करुण वल्लिका,

      ओ
तोर   श्रान्त मल्लिका

   झरो-झरो हल, एइ वेला तोर शेष कथा दिस वलि॥

यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।