वादल-धारा हल सारा, वाजे विदाय़-सुर
Badal dhara holo sara
प्रकृति
वादल-धारा हल सारा, वाजे विदाय़-सुर।
गानेर पाला शेष क’रे दे रे, यावि अनेक दूर॥
छाड़ल खेय़ा ओ पार हते भाद्रदिनेर भरा स्रोते रे,
दुलछे तरी नदीर पथे तरङ्गवन्धुर॥
कदमकेशर ढेकेछे आज वनतलेर धूलि,
मौमाछिरा केय़ावनेर पथ गिय़ेछे भुलि।
अरण्ये आज स्तव्ध हाओय़ा, आकाश आजि शिशिर-छाओय़ा रे
आलोते आज
स्मृतिर आभास वृष्टिर विन्दुर॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Baadol dhaara halo saara, baaje biday sur. Gaaner paala shesh kore de re, jaabi aanek dur. Chhaarlo kheya o paar hote bhaadrodiner bhara srote re, Dulchhe tori nodir pathe tarongobondhur. Kadomkesaar dhekechhe aaj bonotaler dhuli, Moumachhira keyaboner path giyechhe bhuli. Aaronye aaj stabdho haawa, aakash aaji shishir-chhaawa re Aalote aaj smritir aabhas bristir bindur.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1922(১৩২৯)
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