वसन्त तार गान लिखे याय़
Basanta tar gan
प्रकृति
वसन्त तार गान लिखे याय़ धूलिर ’परे की आदरे॥ ताइ से धुला ओठे हेसे वारे वारे नवीन वेशे, वारे वारे रूपेर साजि आपनि भरे की आदरे॥ तेमनि परश लेगेछे मोर हृदय़तले, से ये ताइ धन्य हल मन्त्रवले। ताइ प्राणे कोन् माय़ा जागे, वारे वारे पुलक लागे, वारे वारे गानेर मुकुल आपनि धरे की आदरे॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Basonto taar gaan likhe jaay dhulir pore Ki aadore. Taai se dhula otthe hese baare baare nobin beshe, Baare baare ruper saaji aapni bhore Ki aadore. Temni parosh legechhe mor hridaytale, Se je taai dhonyo holo montrbale. Taai praane kon maaya jaage, Baare baare pulok laage, Baare baare gaaner mukul aapni dhare Ki aadore.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1921(১৩২৮)
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