वेदना की भाषाय़ रे
Bedona ki bhasay
प्रकृति
वेदना की भाषाय़ रे
मर्मे मर्मरि गुञ्जरि वाजे॥
से वेदना समीरे समीरे सञ्चारे,
चञ्चल वेगे विश्वे
दिल दोला॥
दिवानिशा आछि निद्राहरा विरहे
तव
नन्दनवन-अङ्गनद्वारे,
मनोमोहन वन्धु–
आकुल
प्राणे
पारिजातमाला सुगन्ध हाने॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Bedona ki bhaasaay re Marme marmori gunjori baaje. Se bedona somire somire sanchare, Chanchalo bege bishwe dilo dola. Dibanisha aachhi nidrahaara birahe Tabo nandanobono-anganodwaare, Manomohan bondhu - Aakul praane Paarijatomaala sugandho haane.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1931(১৩৩৮)
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