विश्वजोड़ा फाँद पेतेछ
Biswajora phad petechho
पूजा
१८७
विश्वजोड़ा फाँद पेतेछ, केमने दिइ फाँकि!
आधेक धरा पड़ेछि गो, आधेक आछे वाकि॥
केन जानि आपना भुले वारेक हृदय़ याय़ ये खुले,
वारेक तारे ढाकि॥
वाहिर आमार शुक्ति येन कठिन आवरण–
अन्तरे मोर तोमार लागि एकटि कान्ना-धन।
हृदय़ वले तोमार दिके रइवे चेय़े अनिमिखे,
चाय़ ना केन आँखि?। यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Bishwajora phnaad petechho, kemone diyi phnaaki ! Aadhek dhara porechhi go, aadhek aachhe baaki. Keno jaani aapna bhule baarek hriday jaay je khule, Baarek taare dhaaki. Aadhek dhara porechhi je, aadhek aachhe baaki. Baahir aamar shukti jeno kothin aaboran - Antare mor tomar laagi ekti kaanna-dhan. Hriday bole tomar dike roibe chheye animikhe, Chaay naa keno aakhi ? Aadhek dhara porechhi je, aadhek aachhe baaki.
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- पर्याय
- पूजा · 187(পূজা)
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- गीतालि(গীতালি)
- स्थान
- शांतिनिकेतन(শান্তিনিকেতন)
- स्वरबितान खण्ड
- स्वरबितन ४२ (अरुप्रतन्)(স্বরবিতান ৪২ (অরূপরতন))
- स्वरलिपि
- सुधीर चंद्र करसुधीर चंद्र कर1906–1977Rabindranath's personal scribe in his last years: when illness kept the poet from writing, he dictated and Sudhirchandra set it down.
- रचनाकाल
- 5 October 1914(১৯ আশ্বিন ১৩২১)
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