व्याकुल वकुलेर फुले
Bakul bokuler phule
प्रकृति
व्याकुल वकुलेर फुले भ्रमर मरे पथ भुले॥
आकाशे की गोपन
वाणी वातासे करे कानाकानि,
वनेर अञ्चलखानि पुलके उठे दुले दुले॥
वेदना सुमधुर हय़े भुवने आजि गेल वय़े।
वाँशिते माय़ा-तान
पूरि के आजि मन करे चुरि,
निखिल ताइ मरे घुरि विरहसागरेर कूले॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Byakul bokuler phule bhromor mare patho bhule. Aakashe ki gopan baani baatase kore kaanakaani, Boner aancholkhaani puloke otthe dule dule. Bedona sumodhur hoye bhubone aaji gelo boye. Bnaashite maaya-taan puri ke aaji mon kore churi, Nikhil taai mare ghuri birahosaagorer kule.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1916(১৩২৩)
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