चित्त आमार हारालो आज
Chitto amar haralo
प्रकृति
चित्त आमार हारालो आज मेघेर माझखाने– कोथाय़ छुटे चलेछे से कोथाय़ के जाने॥ विजुलि तार वीणार तारे आघात करे वारे वारे, वुकेर माझे वज्र वाजे की महाताने॥ पुञ्ज पुञ्ज भारे भारे निविड़ नील अन्धकारे जड़ालो रे अङ्ग आमार, छड़ालो प्राणे। पागल हाओय़ा नृत्ये माति हल आमार साथेर साथि– अट्टहासे धाय़ कोथा से, वारण ना माने॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Chitto aamar haaralo aaj megher maajhkhane - Kothay chhute cholechhe se kothay ke jaane. Bijuli taar binar taare aaghat kare baare baare, Buker maajhe bajro bajae ki mohataane. Punjo punjo bhaare bhaare nibiro nil aandhokare Jaralo re ango aamar, chharaalo praane. Paagol haawa nritte maati holo aamar saather saathi - Atto haase dhaay kotha se, baaron na maane.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1 June 1910(১৮ জ্যৈষ্ঠ ১৩১৭)
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