एइ कथाटा धरे राखिस
Ei kothata dhore rakhis
पूजा
१९०
एइ कथाटा धरे राखिस– मुक्ति तोरे पेतेइ हवे।
ये पथ गेछे पारेर पाने से पथे तोर येतेइ हवे॥
अभय़ मने कण्ठ छाड़ि गान गेय़े तुइ दिवि पाड़ि,
खुशि हय़े झड़ेर हाओय़ाय़ ढेउ ये तोरे खेतेइ हवे॥
पाकेर घोरे घोराय़ यदि, छुटि तोरे पेतेइ हवे।
चलार पथे काँटा थाके, द’ले तोमाय़ येतेइ हवे।
सुखेर आशा आँकड़े लय़े मरिस ने तुइ भय़े भय़े,
जीवनके तोर भ’रे निते मरण-आघात खेतेइ हवे॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Ei kothata dhore raakhis - mukti tore petei hobe. Je poth gechhe paarer paane se pothe tor jetei hobe. Abhoy mone kantho chhaari gaan geye tui dibi paari, Khushi hoye jhorer haaway dheu je tore khetei hobe. Paaker ghore ghoray jodi, chhuti tore petei hobe. Chalar pathe knaata thaake, dole tomay jetei hobe. Sukher aasha aankre loye moris ne tui bhoye bhoye, Jibanke tor bhore nite maron-aaghaat khetei hobe.
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- स्वरबितान खण्ड
- स्वरबीतन ४४(স্বরবিতান ৪৪)
- स्वरलिपि
- सुधीर चंद्र करसुधीर चंद्र कर1906–1977Rabindranath's personal scribe in his last years: when illness kept the poet from writing, he dictated and Sudhirchandra set it down.
- रचनाकाल
- 18 September 1914(২ আশ্বিন ১৩২১)
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