गीत / Puja

ওগো সুন্দর, একদা কী জানি (একদা কী জানি)

Puja
५३४

      ओगो सुन्दर,
एकदा की जानि कोन् पुण्येर फले

      आमि वनफुल तोमार
मालाय़ छिलाम तोमार गले॥

तखन प्रभाते प्रथम तरुण आलो

घुम-भाङा चोखे धरार लेगेछे भालो,

      विभासे ललिते नवीनेर
वीणा वेजेछे जले स्थले॥

  आजि ए क्लान्त दिवसेर अवसाने

लुप्त आलोय़, पाखिर सुप्त गाने,

      श्रान्ति-आवेशे यदि
अवशेषे झरे फुल धरातले–

सन्ध्यावातासे अन्धकारेर पारे

पिछे पिछे तव उड़ाय़े चलुक तारे,

      धुलाय़ धुलाय़ दीर्ण
जीर्ण ना होक से पले पले॥

यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।

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