गीत / आनुष्ठानिक

एसो हे गृहदेवता (एसो आश्रमदेवता)

eso he grrihadevata eso ashramadevata

आनुष्ठानिक
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एसो    हे   गृहदेवता
 ए भवन  पुण्यप्रभावे करो पवित्र।
 विराजो  जननी, सवार  जीवन भरि–
 देखाओ  आदर्श महान चरित्र॥
 शिखाओ  करिते क्षमा,  करो  हे क्षमा,
 जागाय़े  राखो मने तव उपमा,
 देहो  धैर्य हृदय़े–
 सुखे  दुखे सङ्कटे अटल चित्त॥

 देखाओ  रजनी-दिवा     विमल विभा,
 वितरो  पुरजने शुभ्र प्रतिभा–
 नव  शोभाकिरणे
 करो  गृह सुन्दर रम्य विचित्र॥
 सवे  करो प्रेमदान    पूरिय़ा प्राण–
 भुलाय़े  राखो, सखा,  आत्माभिमान।
 सव  वैर हवे दूर
 तोमारे  वरण करि जीवनमित्र॥

यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।