गुरुपदे मन करो अर्पण
Gurupade mon karo arpan
नाट्यगीति
गुरुपदे मन करो अर्पण, ढालो धन ताँर झुलिते। लघु हवे भार, रवे नाको आर भवेर दोलाय़ दुलिते। हिसावेर खाता नाड़ो व’से व’से, महाजने नेय़ सुद क’षे क’षे – खाँटि येइ जन सेइ महाजने केन थाको हाय़ भुलिते। दिन चले याय़ ट्याँके टाका हाय़ केवलइ खुलिते तुलिते॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Gurupade mon karo arpan, dhaalo dhan tnaar julite. Loghu hobe bhaar, rabe naako aar bhaber dulay dulite. Hishaber khaata naaro bose bose, mahajone ney sud koshe koshe - Khnaati jei jon se mahajane keno thaako haay bhulete. Din chole jaay tnake taaka haay keboli khulite tulite.
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- पर्याय
- नाट्यगीति · 117(নাট্যগীতি)
- संकलन
- चित्रांगदा(চিত্রাঙ্গদা)
- स्वरबितान खण्ड
- स्वरबितन १७ (चित्रन्गद)(স্বরবিতান ১৭ (চিত্রাঙ্গদা))
- स्वरलिपि
- शैलजरंजन मजुमदारशैलजरंजन मजुमदार1900–1992A teacher of chemistry at Visva-Bharati who became one of the great teachers of Rabindrasangeet, and the notator of many songs of the poet's last years.
- रचनाकाल
- 1938(১৩৪৫)
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