हेरिया श्यामल घन नील गगने
Heriya shymalo ghano
प्रकृति
हेरिया श्यामल घन नील गगने सेइ सजल काजल आँखि पडिल मने ॥ अधर करुणा-माखा, मिनतिवेदना-आँका नीरवे चाहिया थाका विदायखने ॥ झरझर झरे जल, विजुलि हाने, पवन मातिछे वने पागल गाने । आमार परानपुटे कोन्खाने व्यथा फुटे, कार कथा जेगे उठे हृदयकोणे ॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Heriya shyamolo ghano nil gagone Sei sajol kaajol aankhi porilo mone. Adhor koruna-maakha, Minotibedona-aanka Nirabe chaahiya thaaka Bidayokhane. Jharojharo jhare jal, bijuli haane, Pabono maatichhe bone paagolo gaane. Aamar poranpute Konkhane byatha phute, Kaar katha jege utthe Hridayokone.
मेरा नोट
निजी नोट आपकी योजना में शामिल नहीं हैं।सदस्य बनें →
इंटरैक्टिव स्वरलिपि जल्द ही आ रही है।
यूट्यूब पर
- पर्याय
- प्रकृति · 30(প্রকৃতি)
- उप-पर्याय
- बोर्श(বোর্শ)
- राग
- गौद्-मल्हर(গৌড়-মল্হার)
- ताल
- त्रिताल(ত্রিতাল)
- घराना
- हिन्दुस्तानी(হিন্দুস্তানি)
- ऋतु
- बरसात(বর্ষা)
- संकलन
- कल्पना(কল্পনা)
- स्वरबितान खण्ड
- स्वरबितन ११ (केतकि)(স্বরবিতান ১১ (কেতকী))
- स्वरलिपि
- दिनेंद्रनाथ ठाकुर
दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 22 September 1897(৬ আশ্বিন ১৩০৪)
AI अनुवाद
अभी कोई अनुवाद नहीं — नीचे कोई भाषा चुनकर AI से अनुवाद बनाएँ।
भाषाएँ
प्रीमियम भाषाएँ
AI-निर्मित
अनुवाद बन रहा है…
इस समय अनुवाद नहीं बनाया जा सका। फिर से प्रयास करें।