गीत / प्रकृति

हिमगिरि फेले (हे सन्न्यासी, हिमगिरि फेले)

himagiri phele he sannyasi himagiri phele

प्रकृति
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हे सन्न्यासी,

       हिमगिरि
फेले  नीचे नेमे एले  किसेर जन्य।

कुन्दमालती  करिछे मिनति,  हओ प्रसन्न॥

     याहा-किछु म्लान विरस
जीर्ण  दिके दिके दिले करि विकीर्ण।

     विच्छेदभारे
वनच्छाय़ारे   करे विषण्ण– हओ प्रसन्न॥

    ‍   साजावे कि डाला,
गाँथिवे कि माला  मरणसत्रे!

       ताइ
उत्तरी,    निले भरि
भरि,    शुकानो पत्रे?

     धरणी ये तव ताण्डवे
साथि  प्रलय़वेदना निल वुके पाति।

     रुद्र, एवारे वरवेशे
तारे   करो गो धन्य– हओ प्रसन्न॥

यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।