गीतबितान पसंद आ रहा है? आर्काइव का समर्थन करें और सदस्य सुविधाएँ अनलॉक करें। सदस्य बनें → गीत / Aanushthanik Sangeet
Yademi prasphuranniba
Aanushthanik Sangeet
यदेमि प्रस्फुरन्निव दृतिर्नध्मातो अद्रिवः ।
मृड़ा, सुक्षत्र, मृड़ाय ॥
क्रत्वः समह दीनता प्रतीपं जगमा शूचे ।
मृड़ा, सुक्षत्र, मृड़ाय ॥
अपां मध्ये तस्थिवांसं तृष्णा विदज्जरितारम् ।
मृड़ा, सुक्षत्र, मृड़ाय ॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
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