येते येते चाय़ ना येते
Jete jete chay na jete
पूजा
येते येते चाय़ ना येते, फिरे फिरे चाय़–
सवाइ मिले पथे चला हल आमार दाय़ गो॥
दुय़ार धरे दाँड़िय़े थाके– देय़ ना साड़ा हाजार डाके–
वाँधन एदेर साधनधन, छिँड़ते ये भय़ पाय़॥
आवेशभरे धुलाय़ प’ड़े कतइ करे छल,
यखन वेला यावे चले फेलवे आँखिजल।
नाइ भरसा, नाइ ये साहस, चित्त अवश, चरण अलस–
लतार मतो जड़िय़े धरे आपन वेदनाय़॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Jete jete chaay naa jete, phire phire chaay - Sabai mile pathe chalaa holo aamar daay. Duwar dhore dnaarie thaake - deya naa saara haajar daake - Bnaadhan eder saadhanodhan, chhnirte je bhoy paay. Aabeshbhare dhulay pore katoi kore chhal, Jakhon bela jaabe chole phelbe aankhijal. Naai bharosa, naai je saahas, chitto abash, charon alas - Latar moto joriye dhare aapon bedonay.
मेरा नोट
निजी नोट आपकी योजना में शामिल नहीं हैं।सदस्य बनें →
इसके लिए उच्च योजना चाहिए — अधिक मासिक प्ले और एक्सपोर्ट, गाने की स्वरलिपि तथा स्केल, वाद्ययंत्र, ताल और लय नियंत्रण के लिए अपग्रेड करें। सभी प्लान देखें → Patreon से साइन इन करें
यूट्यूब पर
- पर्याय
- पूजा · 153(পূজা)
- उप-पर्याय
- बिरह(বিরহ)
- राग
- किर्तन(কীর্তন)
- ताल
- झप्ताल(ঝাঁপতাল)
- घराना
- शास्त्रीय और क्षेत्रीय रूप(শাস্ত্রীয় ও আঞ্চলিক রূপ)
- संकलन
- गीतालि(গীতালি)
- प्रकाशित
- प्रोबसि(প্রবাসী)
- स्थान
- शांतिनिकेतन(শান্তিনিকেতন)
- स्वरबितान खण्ड
- स्वरबीतन ४४(স্বরবিতান ৪৪)
- स्वरलिपि
- सुधीर चंद्र करसुधीर चंद्र कर1906–1977Rabindranath's personal scribe in his last years: when illness kept the poet from writing, he dictated and Sudhirchandra set it down.
- रचनाकाल
- 13 September 1914(২৮ ভাদ্র ১৩২১)
AI अनुवाद
अभी कोई अनुवाद नहीं — नीचे कोई भाषा चुनकर AI से अनुवाद बनाएँ।
भाषाएँ
प्रीमियम भाषाएँ
AI-निर्मित
अनुवाद बन रहा है…
इस समय अनुवाद नहीं बनाया जा सका। फिर से प्रयास करें।