कदम्वेरइ कानन घेरि
Kadamberi kanan gheri
प्रकृति
कदम्वेरइ कानन घेरि आषाढ़मेघेर छाय़ा खेले, पिय़ालगुलि नाटेर ठाटे हाओय़ाय़ हेले॥ वरषनेर परशने शिहर लागे वने वने, विरही एइ मन ये आमार सुदूर-पाने पाखा मेले॥ आकाशपथे वलाका धाय़ कोन् से अकारणेर वेगे, पूव हाओय़ाते ढेउ खेले याय़ डानार गानेर तुफान लेगे। झिल्ली मुखर वादल-साँझे के देखा देय़ हृदय़-माझे, स्वपनरूपे चुपे चुपे व्याथाय़ आमार चरन फेले॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Kadomberi kaanon gheri aasharhomeghero chhaaya khele, Piyalguli naater tthaate haaway hele. Baroshaner paroshane sihar laage bone bone, Birohi ei mon je aamar sudur paane paakha mele. Aakashpathe balaka dhaay kon se akaraner bege, Pub haawate dheu khele jaay daanar gaaner tuphan lege. Jhillimukhoro baadol snaajhe ke dekha dey hriday-maajhe, Swaponrupe chupe chupe byathay aamar charon phele.
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- अनादिकुमार दस्तिदारअनादिकुमार दस्तिदार1903–1974Singer and teacher, and one of the notable propagators of Rabindrasangeet.
- रचनाकाल
- 1923(১৩৩০)
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