कत काल रवे वल भारत रे
Kato kal robe balo
नाट्यगीति
कत काल रवे वल’ भारत रे शुधु डाल भात जल पथ्य क’रे। देशे अन्नजलेर हल घोर अनटन— धर’ हुइस्कि-सोडा आर मुर्गि-मटन। याओ ठाकुर चैतन-चुट्कि निय़ा— एस’ दाड़ि नाड़ि कलिमद्दि मिय़ा।
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Kato kaalo robe balo bhaarat re, Shudhu daal bhaato jalo pothyo kore. Deshe annojaler holo ghor antan - Dharo whisky-soda aar murgi-motton Jaao thakur choitan chutki niya - Eso daari naari kaalimaddi miyna.
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गाने की स्वरलिपि: दोहराई जाने वाली पंक्तियाँ गाने के अनुसार लिखी गई हैं, इसलिए यह मुद्रित मूल स्वरलिपि नहीं है।
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- अनादिकुमार दस्तिदारअनादिकुमार दस्तिदार1903–1974Singer and teacher, and one of the notable propagators of Rabindrasangeet.
- रचनाकाल
- 1900(১৩০৭)
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