के उठे डाकि
Ke uthe daki mamo
प्रेम
के उठे
डाकि मम वक्षोनीड़े थाकि
करुण मधुर अधीर
ताने विरहविधुर पाखि॥
निविड़ छाय़ा गहन माय़ा, पल्लवघन निर्जन वन–
शान्त पवने कुञ्जभवने के जागे एकाकी॥
यामिनी
विभोरा निद्राघनघोरा–
घन
तमालशाखा निद्राञ्जन-माखा।
स्तिमित तारा चेतनहारा, पाण्डु गगन तन्द्रामगन–
चन्द्र श्रान्त दिकभ्रान्त निद्रालस-आँखि॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Ke utthe daaki mamo bokkhonire thaaki Korun modhur adhir taane birahobidhuro paakhi. Nibiro chhaaya gahono maaya, pallabghano nirjano bono - Shaanto pabone kunjobhabone ke jaage ekaki. Jaamini bibhora nidraghanoghora - Ghano tamaloshaakha nidranjano-maakha. Stimito taara chetanohaara, pandu gagon tandramagono Chandro shraanto dikbhranto nidralaso-aankhi.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 8 November 1895(২২ কার্তিক ১৩০২)
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