केन वाजाओ काँकन कनकन
Keno bajao kakon
प्रेम
केन वाजाओ काँकन कनकन कत छलभरे। ओगो, घरे फिरे चलो कनककलसे जल भरे॥ केन जले ढेउ तुलि छलकि छलकि कर खेला। केन चाह खने खने चकित नय़ने कार तरे कत छलभरे॥ हेरो यमुना-वेलाय़ आलसे हेलाय़ गेल वेला, यत हासिभरा ढेउ करे कानाकानि कलस्वरे कत छलभरे। हेरो नदीपरपारे गगनकिनारे मेघमेला, तारा हासिय़ा हासिय़ा चाहिछे तोमारि मुख’परे कत छलभरे॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Keno baajao knaakono kanokano kato chhalobhare. Ogo, ghare phire chalo kanakokalose jal bhore. Keno jale dheu tuli chhaloki chhaloki karo khela. Keno chaaho khane khane chokito nayone kaar tare kato chholobhare. Hero jomuna belay aalose helay gelo bela, Jato haasibhara dheu kare kaanakaani kalosware kato chhalobhare. Hero nodiparopaarey gaganokinare meghomaala, Taara haasiya haasiya chaahichhe tomari mukhopare kato chhalobhare.
मेरा नोट
निजी नोट आपकी योजना में शामिल नहीं हैं।सदस्य बनें →
इसके लिए उच्च योजना चाहिए — अधिक मासिक प्ले और एक्सपोर्ट, गाने की स्वरलिपि तथा स्केल, वाद्ययंत्र, ताल और लय नियंत्रण के लिए अपग्रेड करें। सभी प्लान देखें → Patreon से साइन इन करें
यूट्यूब पर
- पर्याय
- प्रेम · 123(প্রেম)
- उप-पर्याय
- प्रेम्-बोइचित्र(প্রেম্-বোইচিত্র)
- राग
- कफ़ि(কাফি)
- ताल
- तेयोर(তেওরা)
- घराना
- हिन्दुस्तानी(হিন্দুস্তানি)
- संकलन
- कल्पना(কল্পনা)
- स्वरबितान खण्ड
- स्वरबीतन १३(স্বরবিতান ১৩)
- स्वरलिपि
- दिनेंद्रनाथ ठाकुर
दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1897(১৩০৪)
AI अनुवाद
अभी कोई अनुवाद नहीं — नीचे कोई भाषा चुनकर AI से अनुवाद बनाएँ।
भाषाएँ
प्रीमियम भाषाएँ
AI-निर्मित
अनुवाद बन रहा है…
इस समय अनुवाद नहीं बनाया जा सका। फिर से प्रयास करें।