कोथा ये उधाओ हल मोर प्राण उदासी
आजि भरा वादरे॥
घन घन गुरु गुरु गरजिछे,
झरो झरो नामे दिके दिगन्ते
जलधारा–
मन छुटे शून्ये शून्ये अनन्ते
अशान्त वातासे॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Kotha je udhao holo mor praan udaasi
Aaji bhara baadore.
Ghano ghano guru guru garojichhe,
Jharo jharo naame dike digante jalodhaara -
Mon chhute shunye shunye anante ashanto baatase.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुरदिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain
रचनाकाल
1925(১৩৩২)
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