क्षत यत क्षति यत मिछे हते मिछे
Khato jato khoti jato
पूजा
३३२ क्षत यत क्षति यत मिछे हते मिछे, निमेषेर कुशाङ्कुर पड़े रवे नीचे॥ की हल ना, की पेले ना, के तव शोधे नि देना, से सकलइ मरीचिका मिलाइवे पिछे॥ एइ-ये हेरिले चोखे अपरूप छवि अरुण गगनतले प्रभातेर रवि– एइ तो परम दान सफल करिल प्राण, सत्येर आनन्दरूप एइ तो जागिछे॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Khato jato khoti jato michhe hote michhe, Nimesher kushankur pore robe niche. Ki holo na, ki pele na, ke tabo sodhe ni dena Se sakoli morichika milaybe pichhe. Ei-je herile chokhe aporup chobi Orun gagonotale probhater robi - Ei to paromo daan saphal korilo praan, Sotyer aanondorup Ei to jaagichhe.
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- पूजा · 332(পূজা)
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- दिनेंद्रनाथ ठाकुर
दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 11 November 1926(২৫ কার্তিক ১৩৩৩)
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