लक्ष्मी यखन आसवे तखन कोथाय़ तारे दिवि रे ठाँइ?
देख् रे चेय़े आपन-पाने, पद्मटि नाइ, पद्मटि नाइ॥
फिरछे केँदे प्रभातवातास, आलोक ये तार म्लान हताश,
मुखे चेय़े आकाश तोरे शुधाय़ आजि नीरवे ताइ॥
कत गोपन आशा निय़े कोन् से गहन रात्रिशेषे
अगाध जलेर तला हते अमल कुँड़ि उठल भेसे।
हल ना तार फुटे ओठा, कखन भेङे पड़ल वोँटा–
मर्त-काछे स्वर्ग या चाय़ सेइ माधुरी कोथा रे पाइ॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
मेरा नोट
निजी नोट आपकी योजना में शामिल नहीं हैं।सदस्य बनें →
इसके लिए उच्च योजना चाहिए — अधिक मासिक प्ले और एक्सपोर्ट, गाने की स्वरलिपि तथा स्केल, वाद्ययंत्र, ताल और लय नियंत्रण के लिए अपग्रेड करें।सभी प्लान देखें →Patreon से साइन इन करें