লক্ষ্মী যখন আসবে তখন কোথায তারে দিবি রে ঠাঁই ?
Lakkhi jakhon asbe
Puja
लक्ष्मी यखन आसवे तखन कोथाय तारे दिवि रे ठाँइ ? देख् रे चेये आपन-पाने, पद्मटि नाइ, पद्मटि नाइ ॥ फिरछे केँदे प्रभातवातास, आलोक ये तार स्नान हताश, मुखे चेये आकाश तोरे शुधाय आजि नीरवे ताइ ॥ कत गोपन आशा निये कोन् से गहन रात्रिशेषे अगाध जलेर तला हते अमल कुँडि उठल भेसे । हल ना तार फुटे ओठा, कखन भेङे पडल वोँटा— मर्त्य-काछे स्वर्ग या चाय सेइ माधुरी कोथा रे पाइ ॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Lokkhi jakhon aasbe takhon kothay taare dibi re thnaai. Dekh, re cheye aapon-paane, paddoti naai. Phirche knede probhat baatas, aalok je taar mlaano hatash. Mukhe cheye aakash tore shudhay aaji nirabe taai. Kato gopan aasha niye kon se gahon raatrisheshe. Aghaadh jaler tala hote amol knuri utthlo bhese. Holo na taar phute ottha, kakhon bhenge porlo bnota, Marto-kaachhe swargo ja chaay sei maadhuri kotha re paai.
मेरा नोट
निजी नोट आपकी योजना में शामिल नहीं हैं।सदस्य बनें →
इंटरैक्टिव स्वरलिपि जल्द ही आ रही है।
यूट्यूब पर
- पर्याय
- Puja · 152(পূজা)
- उप-पर्याय
- Biraha
- घराना
- Hindustani
- संकलन
- Geetali
- स्थान
- Surul
- स्वरबितान खण्ड
- 44
- स्वरलिपि
- Sudhir Chandra Kar / Shailajaranjan Majumdar
- रचनाकाल
- 18 September 1914(২ আশ্বিন ১৩২১)
AI अनुवाद
अभी कोई अनुवाद नहीं — नीचे कोई भाषा चुनकर AI से अनुवाद बनाएँ।
भाषाएँ
प्रीमियम भाषाएँ
AI-निर्मित
अनुवाद बन रहा है…
इस समय अनुवाद नहीं बनाया जा सका। फिर से प्रयास करें।
इस गीत में कोई गलती दिखी?