मरणेर मुखे रेखे
Maroner mukhe rekhe
पूजा
५८७
मरणेर मुखे रेखे दूरे
याओ दूरे याओ चले
आवार व्यथार टाने निकटे फिरावे
व’ले॥
आँधार-आलोर पारे खेय़ा दिइ वारे वारे,
निजेरे हाराय़े खुँजि– दुलि सेइ दोले दोले॥
सकल रागिणी वुझि वाजावे आमार
प्राणे–
कभु भय़े कभु जय़े, कभु अपमाने
माने।
विरहे भरिवे सुरे ताइ रेखे दाओ दूरे,
मिलने वाजिवे वाँशि ताइ टेने आन कोले॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Maroner mukhe rekhe dure jaao dure jaao chole Aabar byathar taane nikate phirabe bole. Aandhar-aalor paare kheya dei baare baare, Nijere haaraye khunji - duli sei dole dole. Sakol raagini bujhi baajabe aamar praane - Kobhu bhaye kobhu jaye, kobhu apomaane maane. Birahe bhoribe sure taai rekhe daao dure, Milane baajibe bnaashi, taai tene aano kole.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 18 June 1925(৪ আষাঢ় ১৩৩২)
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