मरुविजय़ेर केतन उड़ाओ शून्ये
Morubijoyer ketan urao
आनुष्ठानिक
१२ मरुविजय़ेर केतन उड़ाओ शून्ये हे प्रवल प्राण। धूलिरे धन्य करो करुणार पुण्ये हे कोमल प्राण॥ मौनी माटिर मर्मेर गान कवे उठिवे ध्वनिय़ा मर्मर तव रवे, माधुरी भरिवे फुले फले पल्लवे हे मोहन प्राण॥ पथिकवन्धु , छाय़ार आसन पाति एसो श्यामसुन्दर। एसो वातासेर अधीर खेलार साथि, माताओ नीलाम्वर। उषाय़ जागाओ शाखाय़ गानेर आशा, सन्ध्याय़ आनो विरामगभीर भाषा, रचि दाओ राते सुप्त गीतेर वासा हे उदार प्राण॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Morubijayero ketono uraao shunye hey probal praan. Dhulire dhonyo karo korunar punye hey komal praan. Mouni maatir mormer gaan kobe utthibe dhwoniya marmoro tabo rabe, Maadhuri bhoribe phule phule pallobe hey mohano praan. Pothikbondhu, chhaayar aason paati eso shyamosundor. Eso baataser adhir khelar saathi, maatao nilambar. Ushay jaagao shaakhay gaaner aasha, sondhay aano biramogobhir bhaasa, Rochi daao raate supto giter baasa hey udaar praan.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1925(১৩৩২)
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