गीत / Swadesh

মাতৃমন্দির-পুণ্য-অঙ্গন কর’ মহোজ্জ্বল আজ হে

Swadesh
मातृमन्दिर-पुण्य-अङ्गन कर’ महोज्ज्वल आज हे

वर  -पुत्रसङ्घ विराज’ हे।

शुभ  शङ्ख वाजह वाज’ हे।

घन  तिमिररात्रिर चिर प्रतीक्षा,

पूर्ण कर’, लह’ ज्योतिदीक्षा,

यात्रीदल सव साज’ हे।

शुभ  शङ्ख वाजह वाज’ हे।

वल   जय़ नरोत्तम, पुरुषसत्तम,

जय़ तपस्वीराज हे।

       जय़ हे, जय़
हे, जय़ हे, जय़ हे॥

एस’  वज्रमहासने मातृ-आशीर्भाषणे,

सकल साधक एस’ हे, धन्य कर ए देश हे।

सकल योगी, सकल त्यागी, एस’ दुःखसहदुःखभागी--

एस’ दुर्जय़शक्तिसम्पद मुक्तवन्ध समाज हे।

एस’ ज्ञानी, एस’ कर्मी, नाश’ भारतलाज हे।

एस’ मङ्गल, एस’ गौरव,

एस’ अक्षय़पुण्यसौरभ,

एस’ तेजःसूर्य उज्ज्वल कीर्ति-अम्वर-माझ हे।

वीरधर्मे पुण्यकर्मे विश्वहृदय़े राज’ हे।

शुभ  शङ्ख वाजह वाज’ हे।

जय़   जय़ नरोत्तम, पुरुषसत्तम,

जय़ तपस्वीराज हे।

जय़ हे, जय़ हे, जय़ हे, जय़ हे॥

यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।

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