मन, जाग’ मङ्गललोके अमल अमृतमय़ नव आलोके
Mon jago mangalaloke
पूजा
२६६
मन, जाग’ मङ्गललोके अमल अमृतमय़ नव आलोके
ज्योतिविभासित चोखे॥
हेर’ गगन भरि जागे सुन्दर, जागे तरङ्गे जीवनसागर–
निर्मल प्राते विश्वेर साथे जाग’ अभय़ अशोके॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Mon, jaago, mongaloloke amol amritomoy nabo aaloke Jyotibibhaasito chokhe. Hero gagon bhori jaage sundor, jaage tarange jibonosaagor - Nirmol praate bishwer saathe jaago abhoy ashoke.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1915(১৩২২)
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