मनोमोहन, गहन यामिनीशेषे
Manomohan gahano jaminishese
पूजा
२७८
मनोमोहन, गहन यामिनीशेषे
दिले आमारे जागाय़े॥
मेलिदिले शुभप्राते सुप्त ए आँखि
शुभ्र आलोक लागाय़े॥
मिथ्या स्वपनराजि कोथा मिलाइल,
आँधार गेल मिलाय़े।
शान्तिसरसी-माझे चित्तकमल
फुटिल आनन्दवाय़े॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Monomohano gahano jaaminishese Dile aamare jaagaye. Meli dile shubhropraate supto e aankhi Shubhro aalok laagaye. Mithya swaponoraaji kotha milaailo, Aandhaaro gelo milaaye. Shantisarosi-maajhe chittokamalo Phutilo aanondobaaye.
मेरा नोट
निजी नोट आपकी योजना में शामिल नहीं हैं।सदस्य बनें →
इसके लिए उच्च योजना चाहिए — अधिक मासिक प्ले और एक्सपोर्ट, गाने की स्वरलिपि तथा स्केल, वाद्ययंत्र, ताल और लय नियंत्रण के लिए अपग्रेड करें। सभी प्लान देखें → Patreon से साइन इन करें
यूट्यूब पर
- पर्याय
- पूजा · 278(পূজা)
- उप-पर्याय
- जागोरोन(জাগোরোন)
- राग
- असवरि(আশাবরী)
- ताल
- झप्ताल(ঝাঁপতাল)
- घराना
- हिन्दुस्तानी(হিন্দুস্তানি)
- स्वरबितान खण्ड
- स्वरबीतन २७(স্বরবিতান ২৭)
- स्वरलिपि
- कांगालिचरण सेन / दिनेंद्रनाथ ठाकुर
दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1903(১৩১০)
AI अनुवाद
अभी कोई अनुवाद नहीं — नीचे कोई भाषा चुनकर AI से अनुवाद बनाएँ।
भाषाएँ
प्रीमियम भाषाएँ
AI-निर्मित
अनुवाद बन रहा है…
इस समय अनुवाद नहीं बनाया जा सका। फिर से प्रयास करें।