मरि ओ काहार वाछा, ओके कोथाय निये याय
Mori o kahar bachha
वाल्मीकि प्रतिभा दृश्य 1
मरि ओ काहार वाछा, ओके कोथाय निये याय । आहा ऐ करुण चोखे ओ काहार पाने चाय । वाँधा कठिन पाशे, अङ्ग काँपे त्रासे, आँखि जले भासे, ए की दशा हय । ए वने के आछे, याव कार काछे, के ओरे वाँचाय ।
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Mori o kaahar baachha, oke kothay niye jaaye. Aaha, oi korun chokkhe o kaahar paane chaay. Bnaadha kothin paashe, angono knaape traase, Aankhijale bhaase, e ki dasha haay. E bone ke aachhe, jaabo kaar kaachhe - Ke ore bnaachay.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1886(১২৯৩)
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