ओगो के याय़ वाँशरि वाजाय़े
Ogo ke jay bashori bajaye
प्रेम
ओगो के याय़ वाँशरि वाजाय़े, आमार घरे केह नाइ ये।
तारे मने पड़े यारे चाइ ये॥
तार आकुल परान, विरहेर गान, वाँशि वुझि गेल जानाय़े।
आमि आमार कथा तारे जानाव की
करे, प्राण काँदे मोर ताइ ये॥
कुसुमेर माला गाँथा हल ना, धूलिते प’ड़े शुकाय़ रे।
निशि हय़ भोर, रजनीर चाँद मलिन मुख लुकाय़ रे।
सारा विभावरी कार पूजा करि यौवनडाला साजाय़े–
वाँशिस्वरे हाय़ प्राण निय़े
याय़, आमि केन थाकि हाय़ रे॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Ogo ke jaay bnaashori baajaye aamar ghare keho naai je Taare mone pare jaare chaai je. Taar aakul paraan, biraher gaan, bnaashi bujhi gelo jaanaye. Aami aamar katha taare jaanabo ki kaare, praan knaade mor taai je. Kusumer maala gnaatha holo na, dhulite pore shukay re. Nishi hoy bhor, rajonir chnaad molin mukh lukaay re. Saara bibhabori kaar puja kori jaubanodaala saajaye - Bnaashisware haay praan niye jaay, aami keno thaaki haay re.
मेरा नोट
निजी नोट आपकी योजना में शामिल नहीं हैं।सदस्य बनें →
इसके लिए उच्च योजना चाहिए — अधिक मासिक प्ले और एक्सपोर्ट, गाने की स्वरलिपि तथा स्केल, वाद्ययंत्र, ताल और लय नियंत्रण के लिए अपग्रेड करें। सभी प्लान देखें → Patreon से साइन इन करें
यूट्यूब पर
- पर्याय
- प्रेम · 300(প্রেম)
- उप-पर्याय
- प्रेम्-बोइचित्र(প্রেম্-বোইচিত্র)
- राग
- रम्केलि(রামকেলি)
- ताल
- दद्र(দাদরা)
- घराना
- हिन्दुस्तानी(হিন্দুস্তানি)
- स्वरबितान खण्ड
- स्वरबितन ५० (शेफलि)(স্বরবিতান ৫০ (শেফালি))
- स्वरलिपि
- दिनेंद्रनाथ ठाकुर
दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1886(১২৯৩)
AI अनुवाद
अभी कोई अनुवाद नहीं — नीचे कोई भाषा चुनकर AI से अनुवाद बनाएँ।
भाषाएँ
प्रीमियम भाषाएँ
AI-निर्मित
अनुवाद बन रहा है…
इस समय अनुवाद नहीं बनाया जा सका। फिर से प्रयास करें।