ओगो पुरवासी
Ogo purobasi ami
विचित्र
ओगो पुरवासी,
आमि द्वारे दाँड़ाय़े आछि उपवासी॥
हेरितेछि
सुखमेला, घरे घरे कत
खेला,
शुनितेछि सारा वेला सुमधुर वाँशि॥
चाहि ना अनेक धन, रव
ना अधिक क्षण,
येथा हते आसिय़ाछि सेथा याव भासि।
तोमरा आनन्दे रवे नव नव उৎसवे,
किछु
म्लान नाहि हवे गृहभरा हासि॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Ogo purobasi, Aami dwaare dnaaraye aachhi upobaasi. Heritechhi sukhomela, ghare ghare kato khela, Sunitechhi saara bela sumadhuro bnaashi. Chaahi naa anek dhon, rabo naa odhik khon, Jetha hote aasiyachhi setha jaabo bhaasi. Tomra aanonde rabe nabo nabo utsabe, Kichhu mlaan naahi habe grihobhara haasi.
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- शैलजरंजन मजुमदारशैलजरंजन मजुमदार1900–1992A teacher of chemistry at Visva-Bharati who became one of the great teachers of Rabindrasangeet, and the notator of many songs of the poet's last years. / इंदिरा देवी चौधरनी
इंदिरा देवी चौधरनी1873–1960Rabindranath's niece — scholar, translator and musician, who set down a great many of his songs in notation.Photographer unknown, c. 1890 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1890(১২৯৭)
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