ओरे आय रे तवे, मात् रे सवे आनन्दे
Ore aye re tobe
प्रकृति
ओरे आय रे तवे, मात् रे सवे आनन्दे आज नवीन प्राणेर वसन्ते ॥ पिछन-पानेर वाँधन हते चल् छुटे आज वन्यास्रोते, आपनाके आज दखिन हाओयाय छडिये दे रे दिगन्ते ॥ वाँधन यत छिन्न करो आनन्दे आज नवीन प्राणेर वसन्ते । अकूल प्राणेर सागर-तीरे भय की रे तोर क्षय-क्षतिरे । या आछे रे सव निये तोर झाँप दिये पड् अनन्ते ॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Ore aay re tobe, maat re sobe aanonde Aaj nobino praaner bosonte. Pichhon-paaner bnaadhon hote chol chute aaj bonnyasrote, Aapnake aaj dokhin haaway chhoriye de re digonte. Bnaadhon jato chino karo aanonde Aaj nobino praaner bosonte. Akul praaner saagoro-tire bhoy ki re tor khoy-khotire. Jaa aachhe re sob niye tor jhnaap diye por anonte.
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- सुरुल(সুরুল)
- स्वरबितान खण्ड
- स्वरबितन ७ (फल्गुनि)(স্বরবিতান ৭ (ফাল্গুনী))
- स्वरलिपि
- अनादिकुमार दस्तिदारअनादिकुमार दस्तिदार1903–1974Singer and teacher, and one of the notable propagators of Rabindrasangeet.
- रचनाकाल
- 25 February 1915(১৩ ফাল্গুন ১৩২১)
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