फिरे चल्, फिरे चल्, फिरे चल् माटिर टाने
Phire chal matir tane
आनुष्ठानिक
फिरे चल्, फिरे चल्, फिरे चल् माटिर टाने–
ये माटि आँचल पेते चेय़े आछे मुखेर पाने।
यार वुक फेटे एइ प्राण उठेछे, हासिते यार फुल फुटेछे रे,
डाक दिल ये गाने गाने॥
दिक् हते ओइ दिगन्तरे कोल रय़ेछे पाता,
जन्ममरण तारि हातेर अलख सुतोय़ गाँथा।
ओर हृदय़-गला जलेर धारा सागर-पाने आत्महारा रे
प्राणेर वाणी वय़े आने॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Phire chal, phire chal, phire chal, maatir taane - Je maati aanchol pete cheye achhe mukher paane. Jaar buk phete ei praan utthechhe, haasite jaar phul phutechhe re, Daak dilo je gaane gaane. Dik hote oi digantare kol royechhe paata, Janmomaron taari haater alakh sutoy gnaatha. Or hrioy-gola joler dhaara saagor-paane aatmohaara re Praaner baani boye aane.
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- पर्याय
- आनुष्ठानिक · 15(আনুষ্ঠানিক)
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- स्वरबितन १५ (नबगीतिक) / २(স্বরবিতান ১৫ (নবগীতিকা) / ২)
- स्वरलिपि
- दिनेंद्रनाथ ठाकुर
दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1922(১৩২৯)
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